Dhan Prapti Ke Totke

1. हल्दी की पांच गांठ लेकर उसे लश्मी पूजन करके 108 मंत्रों से अभिमंत्रित करके भवन मे 'शुक्र ' के स्थान पर भूमि मे दबा दें|

2. 108 दिन बरगद की पूजा करके उसे जल से सिंचित करे| 108 वे दिन उसे प्रणाम करके उसकी एक जड़ का छोटा टुकड़ा लाये और ताबीज़ मे भरकर कमर मे बाधे तो लश्मी प्रप्त होती है और दुबलापन दूर होता है|

3. असगन्ध की जड़ को भी उपयुक्त तरीके से प्रयुक्त किया जा सकता है|

4. धातु और लश्मी की दुर्बलता हेतु 'आक' के जड़ का ताबीज़ बनाकर पहनें| आक की पूजा रविवार से प्रारंभ करके शुक्र तक करें और जल दें| शुक्र के प्रांत:काल उतर दिशा की जड़ का एक टुकड़ा लाकर ताबीज़ बनायें|

5. श्वेतार्क की जड़ उपयुक्त विधि से लेकर भवन मे शुक्र के स्थान पर दबाने से लश्मी की वृद्धि  होती है और भूत-प्रेत भाग जाते हैं| 

6. लश्मी को प्रसन करने के लिये शुक्र के स्थान पर भवन मे 'सिद्ध कुबेर कृत लश्मी यंत्र' दबाने से निशिचत  अतुल लश्मी प्रप्त होती है|

7. प्रतिदिन जिमीकन्द एवं तेज पते का 21 दिन तक लश्मी मंत्र के साथ हवन करने से घर मे लश्मी बनी रहती है|

8. एकाशी नारियल प्रप्त कर उसका पूजन करके घर मे प्रतिषिठत करने से सभी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति होती है|

9. घीक्वार, आक, गेंदा, हल्दी आदि के पौधे घर के दार या आंगन मे लगाने से लश्मी की प्राप्ति होती है| 

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